एन सी एच एम सी टी का इतिहास
राष्ट्रीय होटल प्रबंधन एवं केटरिंग प्रौद्योगिकी परिषद (एन सी एच एम सी टी) की स्थापना वर्ष 1982 में भारत सरकार द्वारा पर्यटन मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय के रूप में की गई। इसका उद्देश्य देश में आतिथ्य शिक्षा (Hospitality Education) को व्यवस्थित करना, नियंत्रित करना और प्रोत्साहित करना था। प्रारंभ में इसे नेशनल बोर्ड ऑफ स्टडीज़ इन फ़ूड मैनेजमेंट, केटरिंग एंड न्यूट्रिशन के नाम से जाना जाता था, जिसे बाद में इसके विस्तृत दायरे और बढ़ती शैक्षणिक जिम्मेदारियों को दर्शाते हुए (एन सी एच एम सी टी )नाम दिया गया।
एन सी एच एम सी टी के इतिहास की प्रमुख उपलब्धियाँ:
- 1982: एन सी एच एम सी टी की स्थापना भारत में आतिथ्य शिक्षा के विकास, समन्वय, और पर्यवेक्षण के उद्देश्य से एक स्वायत्त संगठन के रूप में की गई।
- 1989: आतिथ्य शिक्षा में समानता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए परिषद ने सभी संबद्ध संस्थानों के लिए एक मानकीकृत पाठ्यक्रम विकसित किया।
- 1992: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) के सहयोग से परिषद ने 3-वर्षीय बी.एससी. (हॉस्पिटैलिटी एंड होटल एडमिनिस्ट्रेशन) कार्यक्रम प्रारंभ किया, जिससे आतिथ्य शिक्षा को एक राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय ढाँचे के अंतर्गत लाया गया।
- 2000: परिषद ने देशभर में बड़ी संख्या में केंद्रीय, राज्य सरकार प्रायोजित और निजी होटल प्रबंधन संस्थानों (IHMs) को संबद्ध करते हुए अपने नेटवर्क का महत्वपूर्ण विस्तार किया।
- 2020 के बाद: एन सी एच एम सी टी ने वैश्विक मानकों के अनुरूप आतिथ्य शिक्षा को आधुनिक बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए। इसमें डिजिटल लर्निंग, उद्योग–संस्थान सहयोग, आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियाँ और अद्यतन पाठ्यक्रम प्रमुख हैं।
एन सी एच एम सी टी की भूमिका और उद्देश्य:
- आतिथ्य एवं केटरिंग शिक्षा में शैक्षणिक मानकों का निर्धारण, विनियमन और रखरखाव।
- देशभर के IHMs में प्रवेश हेतु NCHM JEE (संयुक्त प्रवेश परीक्षा) का आयोजन।
- आतिथ्य, होटल प्रबंधन और पर्यटन के क्षेत्रों में अनुसंधान, नवाचार और पेशेवर उत्कृष्टता को बढ़ावा देना।
- राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों तथा उद्योग जगत के साथ समन्वय कर इंटर्नशिप, प्लेसमेंट, कौशल विकास, और पाठ्यक्रम को बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना।
वर्तमान स्थिति:
आज एन सी एच एम सी टी देशभर में 70 से अधिक होटल प्रबंधन संस्थानों (IHMs) की निगरानी एवं शैक्षणिक विनियमन करता है, जिनमें केंद्रीय सरकार, राज्य सरकार, सार्वजनिक उपक्रम (PSU) और निजी क्षेत्र द्वारा संचालित संस्थान शामिल हैं। भारत में आतिथ्य शिक्षा का शीर्ष निकाय होने के नाते परिषद आतिथ्य, केटरिंग और पर्यटन क्षेत्रों हेतु कुशल पेशेवर तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और घरेलू तथा वैश्विक स्तर पर रोजगार की मांग को पूरा करने में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है।